आज फिर आँखे भर आई है, दिल रो रहा है
न जाने किसकी याद आई है, आज फिर आँखे भर आई है
याद आई है वो माँ की ममता शायद
या फिर पिता का प्यार
जो छूट गया है बहुत पीछे
जब से बजी शहनाइ है
आज फिर आँखे भर आई है
उम्र के हसीन वर्ष बिताये जिनके साथ
साथ साथ हँसना साथ साथ रोना
साथ साथ खाना साथ साथ सोना
फिर अब क्यों बेटी पराई है
हर बेटी की यही व्यथा है
उसको मिलती क्यों ये सजा है
अपनों को छोड़कर परायो के बीच
क्या कभी उसकी जगह बन पाई है
आज फिर आँखे भर आई है
वो पिता जो उसका अपना था
क्या वो सब बस एक सपना था
माँ जो देखती थी उसका रास्ता
आज फिर नहीं देती दिखाई है
आज फिर आँखे भर आई है
पिता का घर उसका था या फिर
पति का घर उसका अपना है
इस ही कश्मकश में हर औरत
ने जिंदगी अपनी सदा बिताई है
काश मुझे फिर वही दिन मिले जीने में
कसक जिनकी आज भी है मेरे सीने में
मिल भी गए तो फिर वो बात न रहेगी उनमे
क्योंकि मेरी जगह किसी और ने पाई है
आज फिर आँखे भर आई है |
न जाने किसकी याद आई है, आज फिर आँखे भर आई है
याद आई है वो माँ की ममता शायद
या फिर पिता का प्यार
जो छूट गया है बहुत पीछे
जब से बजी शहनाइ है
आज फिर आँखे भर आई है
उम्र के हसीन वर्ष बिताये जिनके साथ
साथ साथ हँसना साथ साथ रोना
साथ साथ खाना साथ साथ सोना
फिर अब क्यों बेटी पराई है
हर बेटी की यही व्यथा है
उसको मिलती क्यों ये सजा है
अपनों को छोड़कर परायो के बीच
क्या कभी उसकी जगह बन पाई है
आज फिर आँखे भर आई है
वो पिता जो उसका अपना था
क्या वो सब बस एक सपना था
माँ जो देखती थी उसका रास्ता
आज फिर नहीं देती दिखाई है
आज फिर आँखे भर आई है
पिता का घर उसका था या फिर
पति का घर उसका अपना है
इस ही कश्मकश में हर औरत
ने जिंदगी अपनी सदा बिताई है
काश मुझे फिर वही दिन मिले जीने में
कसक जिनकी आज भी है मेरे सीने में
मिल भी गए तो फिर वो बात न रहेगी उनमे
क्योंकि मेरी जगह किसी और ने पाई है
आज फिर आँखे भर आई है |
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